पुरुष सूक्तम् तैत्तिरीय आरण्यक ३.१२
−ह −रिःभगवान् विष्णु
−ॐपरब्रह्म का प्रणव
↓स −ह ↑स्र −शी ↓र्षाअसंख्य शिरों वाले
−पु ↑रु −षःपरम पुरुष
।↓स ↓ह −स्र ↓अ −क्षःअसंख्य नेत्रों वाले
↓स −ह ↑स्र −पा −त्असंख्य चरणों वाले
।−सवह
−भू −मि ↑म्पृथ्वी को
↓वि −श्व ↑तःसब ओर से
↓वृ −त्वाव्याप्त करके
।−अ ↑त्य −ति −ष्ठ −त्परे स्थित हुए
−द −श −अ ↓ङ्गु −ल −म्दस अंगुल परे
−पु ↑रु −षपरम पुरुष
↓ए −वही
−इ −द −म्यह
−स −र्व ⇈म्सब कुछ
।−य −त्जो
↓भू −त −म्हो चुका
−य −त्जो
↓च(और)
−भ −व्य ⇈म्होने वाला
।↓उ −ततथा
−अ ↑मृ ↓त −त्व −अ −स्यअमरत्व के
−ई ↑शा −नःस्वामी
।↓य −त्जो
−अ ↑न्ने −नअन्न से
−अ ↓ति −रो ↑ह −तिव्याप्त होते हैं
↓ए −ता ↑वा −न्इतना ही
−अ −स्यउनका
−म ↓हि −माऐश्वर्य
।−अ ↓तःइससे भी
−ज्या −या −न्महान
↓च(और)
−पु ↑रु −षःपुरुष
।−पा −दःएक चरण
⇈अ ↓स्यउनका
−वि ↑श्वासमस्त
↓भू −ता ↑निप्राणी
।↓त्रि −पा ↑दतीन चरण
−अ −स्यउनके
↓अ −मृ −त ↑म्अमृत स्वरूप
↓दि −विदिव्य लोक में
↓त्रि −पा −दतीन चरण
↓ऊ −र्ध्वऊपर
−उ ↓दै −त्प्रकट हुए
−पु ↑रु −षःपुरुष
।−पा −दःएक चरण
⇈अ −स्यउनका
↓इ −हयहाँ
−अ ↑भ −व −त्हुआ
−पु ↑नःफिर
।−त ↓तःउससे
−वि ↓ष्व −ङ्सब ओर
↑व्य −क्रा −म −त्फैले
।↓सावह
−अ ↓श ↓नाभोजनशील
−अ ↓न ↓श −नेअभोजनशील में
↓अ −भिचारों ओर
−त −स्मा ⇈त्उससे
↓वि −रा −ट्विराट रूप
↑अ −जा −य −तउत्पन्न हुआ
।↓वि −रा ↓जःविराट से
−अ ↓धिबाद
−पु ↑रु −षःपुरुष
।−सवह
↓जा −तःजन्म लेकर
−अ ↑त्य −रि −च्य −तबहुत फैले
।↓प −श्चा −त्पीछे से
−भू ↓मि −म्पृथ्वी को
−अ ↑थोऔर भी
↓पु −रःआगे से
−य −त्जिस
−पु ↑रु −षे −णपुरुष रूप
↓ह −वि ⇈षाहवि से
।↓दे −वाःदेवताओं ने
↓य −ज्ञ −म्यज्ञ को
−अ ↑त −न्व −तविस्तृत किया
।↓व ↓स −न्तःवसन्त ऋतु
↑अ −स्यउसका
−आ ↓सी −त्था
−आ −ज्य ⇈म्घृत
।↓ग्री −ष्मःग्रीष्म ऋतु
↓इ −ध्मःसमिधा
↓श −र −त्शरद् ऋतु
↓ह −विःहवि
↓स −प्तसात
−अ −स्यउसकी
↑आ −स −न्थे
−प ↓रि −ध ↑यःपरिधियाँ
।−त्रिःतीन बार
↓स −प्तसात
↓स −मि ↑धःसमिधाएँ
↓कृ −ताःरखी गईं
।↓दे −वाःदेवताओं ने
−य −त्जो
↓य −ज्ञ −म्यज्ञ को
↑त ↓न्वा −नाःविस्तारते हुए
।−अ ↑ब ↓ध्न −न्बाँधा
−पु ↑रु −ष −म्पुरुष को
↓प −शु −म्यज्ञ-पशु रूप में
−त −म्उस
↓य −ज्ञ −म्यज्ञ को
↓ब ↓र्हि ↓षिकुशासन पर
−प्रौ −क्ष ↑न्प्रोक्षण किया
।−पु ↑रु −ष −म्पुरुष को
↓जा −त ↑म्प्रकट
−अ ↓ग्र −तःप्रारम्भ में
।−ते ↑नउससे
↓दे −वाःदेवताओं ने
−अ ↑य −ज −न्तयज्ञ किया
।↓सा −ध्याःसाध्य देव
−ऋ ↑ष −यःऋषि
↓च(और)
−येजो
−त −स्मा ⇈त्उससे
↓य −ज्ञा −त्यज्ञ से
↑स ↓र्व −हु ↑तःजिसमें सब अर्पित था
।−सं ↑भृ −त −म्एकत्र हुआ
−पृ −ष ↓दा −ज्य −म्मिश्रित घृत
।↓प −शू −न्पशुओं को
−ता −न्उन्हें
↑च −क्रेबनाया
−वा ↓य −व्या ↑न्वायुचर
।↓आ ↓र −ण्या −न्वन्य
↓ग्रा −म्या −न्घरेलू
↓च(और)
−येजो
−त −स्मा ⇈त्उससे
↓य −ज्ञा −त्यज्ञ से
↑स ↓र्व −हु ↑तःजिसमें सब अर्पित था
।−ऋ ↓चःऋचाएँ
−सा ↑मा −निसामगान
−ज −ज्ञि −रेउत्पन्न हुए
।−छ −न्दां −सिछन्द
−ज −ज्ञि ↓रेउत्पन्न हुए
−त −स्मा ⇈त्उससे
।−य ↓जुःयजुर्मंत्र
−त ↑स्मा −त्उससे
−अ −जा −य −तउत्पन्न हुआ
−त ↓स्मा −त्उससे
−अ ↑श्वाःघोड़े
−अ −जा −य −न्तउत्पन्न हुए
।−येजो
−केकुछ
−च(और)
↑उ ↓भ −या ↑द −तःदोनों ओर दाँत वाले
।−गा ↑वःगायें
−हनिश्चय ही
−ज −ज्ञि ↓रेउत्पन्न हुईं
−त −स्मा ⇈त्उससे
।−त −स्मा ⇈त्उससे
↓जा −ताःउत्पन्न हुए
↑अ ↓जा −व ↑यःबकरे और भेड़ें
−य −त्जिस
−पु ↑रु −ष ↓म्पुरुष को
↑व्य −द −धुःविभाजित किया
।↓क ↓ति −धाकितने प्रकार से
↑व्य −क −ल्प −य −न्विभाग किए
।−मु −ख ↓म्मुख
−कि ↑म्क्या
−अ ↓स्यउनका
−कौकौन-से दो
↓बा −हूबाहु
।−कौकौन-सी दो
↓ऊ −रूजंघाएँ
−पा −दौचरण
−उ −च्ये −तेकहे गए
↓ब्रा ↓ह्म −णःब्राह्मण
⇈अ ↓स्यउनका
−मु ↑ख −म्मुख
−आ −सी −त्था
।↓बा −हूबाहु
↑रा ↓ज ↑न्यःक्षत्रिय
↓कृ −तःबना
।↓ऊ −रूजंघाएँ
−त −त्वह
↑अ ↓स्यउनके
−य −त्जो
−वै ↑श्यःवैश्य
।↓पा −द्भ्या −म्चरणों से
↓शू −द्रःशूद्र
↑अ −जा −य −तउत्पन्न हुआ
↓च −न्द्र ↓माचन्द्रमा
−म ↑न −सःमन से
↓जा −तःउत्पन्न हुआ
।−च ↓क्षोःनेत्रों से
−सू ↑र्यःसूर्य
−अ −जा −य −तउत्पन्न हुआ
।−मु ↓खा −त्मुख से
−इ ↑न्द्रःइन्द्र
−च(और)
↓अ −ग्निःअग्नि
↑च(और)
।↓प्रा −णा −त्प्राण से
↓वा −युःवायु
↑अ −जा −य −तउत्पन्न हुआ
−ना ↑भ्याःनाभि से
−आ −सी −त्था
↓अ −न्त ↑रि −क्ष −म्अन्तरिक्ष
।↓शी ↓र्ष्णःमस्तक से
−द्यौःस्वर्ग
−स ↑म −व −र्त −तप्रकट हुआ
।↓पा −द्भ्या −म्चरणों से
−भू ↓मिःपृथ्वी
−दि ↓शःदिशाएँ
−श्रो −त्रा ⇈त्कानों से
।−त ↑थाइसी प्रकार
↓लो −का −न्लोकों को
↑अ −क −ल्प −य −न्रचा
−वे −दजानता हूँ
↓अ −ह −म्मैं
↓ए −त −म्इस
−पु ↑रु −ष −म्पुरुष को
↓म −हा −न्त ⇈म्महान
।↓आ ↓दि −त्य ↑व −र्ण ↓म्सूर्यवत् तेजस्वी
−त ↑म ↓सःअन्धकार से
−तुपरन्तु
↓पा −रेपरे
−स ↑र्वा −णिसभी
।↓रू −पा ↑णिरूपों को
↓वि −चि ↓त्यरचकर
−धी ↑रःधीर प्रभु
−ना ↑मा −निनामों को
।↓कृ −त्वाबनाकर
−अ ↓भि −व ↓द ↓न्पुकारते हुए
−य −त्जो
−आ ⇈स्तेस्थित हैं
↓धा −ताविधाता ने
↓पु −र ↓स्ता −त्पूर्व में
−य −म्जिसे
↑उ −दा ↓ज −हा ↑रप्रकट किया
।↓श −क्रःइन्द्र ने
−प्र ↓वि −द्वा −न्पूर्ण ज्ञानी
↓प्र −दि −शःदिशाओं को
−च ↑त −स्रःचारों
।−त −म्उसे
↓ए −व −म्इस प्रकार
↓वि −द्वा ↓न्जानने वाला
−अ −मृ ↑तःअमर
↓इ −हयहाँ
↑भ −व −तिहोता है
।−ननहीं
−अ −न्यःदूसरा
−प ↓न्थाःमार्ग
−अ ↑य −ना −यपरम गति के लिए
−वि −द्य −तेहै
↓य −ज्ञे ↑नयज्ञ से
↓य −ज्ञ ↑म्यज्ञ की
−अ −य −ज −न्तआराधना की
↓दे −वाःदेवताओं ने
।−ता ↓निवे
−ध ↑र्मा −णिधर्म
−प्र ↓थ −मा −निआदि
↑आ −स −न्थे
।−तेवे
↓हनिश्चय ही
−ना −क ↑म्स्वर्ग
−म ↓हि −मा ↑नःमहिमावान
−स −च −न्तेप्राप्त करते हैं
।−य ↓त्रजहाँ
−पू ↑र्वेपूर्वकाल के
↓सा −ध्याःसाध्य देव
−स ↑न्तिहैं
↓दे −वाःदेवता
−ॐपरब्रह्म का प्रणव
−शा −न्तिःशान्ति
−शा −न्तिःशान्ति
−शा −न्तिःशान्ति